रविवार, 13 फ़रवरी 2011

बेबस इंसान

कितना बेबस है इंसान क़िस्मत के आगे
हर सपने टूट जाते हैं, हक़ीक़त के आगे
जिसने कभी किसी के आगे हाथ न फैलाया
वो भी हाथ फैलाता है गोलगप्पे वाले के आगे

2 टिप्पणियाँ:

राकेश कौशिक ने कहा…

"जिसने कभी किसी के आगे हाथ न फैलाया
वो भी हाथ फैलाता है गोलगप्पे वाले के आगे"

वाह - सही है

हरीश सिंह ने कहा…

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